March 10, 2026
New Delhi, India
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India-EU Free Trade Agreement | प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोपीय संघ के साथ ऐतिहासिक ‘Mother of All Deals’ पर हस्ताक्षर किए

India EU Free Trade Agreement 2026


भारत-EU FTA: भारत और यूरोपीय संघ ने मुक्त व्यापार समझौते पर किया ऐतिहासिक समझौता | India EU Free Trade Agreement 2026


भारत-EU FTA 2026: ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता, पीएम मोदी ने कहा ‘Mother of All Deals’

नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) पर सहमति व्यक्त की है, जिसे दोनों पक्ष ‘Mother of All Deals’ यानी “सभी समझौतों की जननी” कहा जा रहा है। इस समझौते का औपचारिक घोषणा 27 जनवरी 2026 को भारत में हुई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष Ursula von der Leyen प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

लगभग 18 वर्षों तक चली लंबी बातचीत के बाद यह समझौता तैयार हुआ है, जिसमें भारत और EU के बीच व्यापार, निवेश, उद्योग, टेक्नोलॉजी तथा सेवा क्षेत्रों में व्यापक सहयोग को शामिल किया गया है। यह FTA लगभग 2 अरब लोगों के बाजार, विश्व GDP के लगभग 25 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के करीब एक तिहाई हिस्से को कवर करेगा।


FTA का ऐतिहासिक महत्व और वैश्विक प्रसंग

भारत-EU FTA दुनिया के सबसे बड़े मुक्त व्यापार क्षेत्रों में से एक का निर्माण करेगा। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों के बीच बिना बाधा के व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, जिससे उत्पादन, विनिर्माण, निर्यात और रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

FTA को मोदी सरकार और EU नेतृत्व दोनों ने एक रणनीतिक कदम बताया है, जो वर्तमान वैश्विक व्यापार चुनौतियों जैसे संरक्षणवादी नीतियाँ, अमेरिका और चीन के बीच व्यापार तनाव, तथा आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता की आवश्यकता आदि को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।


समझौते की पृष्ठभूमि: लंबी बातचीत का सफर

भारतीय और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से यह प्रक्रिया कई बार बाधित हुई। बाद में जून 2022 में वार्ता को फिर से पुनर्जीवित किया गया और 18 वर्षों के बाद 26 जनवरी 2026 को औपचारिक वार्ता सफलतापूर्वक पूरी की गई।

भारत के वाणिज्य सचिव Rajesh Agrawal ने कहा कि यह समझौता “balanced और forward-looking” है, और इसके पूरा होने के बाद अब कानूनी प्रक्रियाएँ और संरक्षणशील समीक्षा (legal scrubbing) पूरी कर 2026 के अंत तक औपचारिक रूप से इसे लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा।


समझौते के आर्थिक लाभ

इस भारत-EU FTA के प्रमुख आर्थिक लाभों में शामिल हैं:

  • टैरिफ कटौती: दोनों पक्षों के बीच कस्टम्स ड्यूटी में कटौती और आसान प्रवेश की व्यवस्था।
  • मेक इन इंडिया को प्रोत्साहन: भारतीय विनिर्माण क्षेत्र को यूरोप में बेहतर पहुंच मिलेगा।
  • निर्यात में वृद्धि: अनुमान है कि 2031 तक भारत के निर्यात में करीब $50 बिलियन की वृद्धि होगी।
  • निवेश आकर्षण: यूरोपीय निवेशकों के लिए भारत का बाजार और अवसर व्यापक होंगे।
  • सेवा क्षेत्र संवर्द्धन: टेलीकॉम, वित्तीय सेवाएँ तथा आईटी जैसे सेक्टर्स में साझेदारी में वृद्धि।

राजनीतिक और रणनीतिक साझेदारी

इस FTA से केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि भारत और EU के बीच राजनीतिक और रणनीतिक साझेदारी भी मजबूत होगी। दोनों पक्षों ने रक्षा, साइबर सुरक्षा, समुद्री सहयोग और आपूर्ति श्रृंखलाओं के समन्वय जैसे विषयों पर भी चर्चा की है।

भारत को EU द्वारा स्थिर और भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखा जा रहा है, जिससे वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक ढांचे में दोनों की भूमिका और मजबूत होगी।


आगे की प्रक्रिया: कानूनी मंज़ूरी और लागू करना

FTA का मसौदा तैयार हो चुका है, लेकिन इसे औपचारिक रूप से लागू करने के लिए कई कानूनी प्रक्रियाएँ पूरी की जानी हैं। इसमें शामिल हैं:

  • EU संसद का अनुमोदन
  • भारतीय कैबिनेट की मंज़ूरी
  • कानूनी समीक्षा और अंतिम मसौदा अनुमोदन

कानूनी प्रक्रियाओं और संसद के अनुमोदन के बाद यह समझौता संभवत: 2027 की शुरुआत में लागू हो जाएगा।


प्रधानमंत्री मोदी और EU नेताओं की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को “एक मॉडल पार्टनरशिप” और “विश्व स्तर पर दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए अवसरों का स्रोत” बताया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत तथा यूरोप के नागरिकों और व्यापार समुदाय के लिए “महत्वपूर्ण अवसर” प्रदान करेगा।

EU आयोग की अध्यक्ष Ursula von der Leyen ने इसे “दुनिया के सबसे बड़े मुक्त व्यापार क्षेत्रों में से एक” कहते हुए कहा कि यह समझौता “दुनिया को अधिक स्थिर, समृद्ध और सुरक्षित बनायेगा।”


FTA का वैश्विक प्रभाव

इस समझौते से वैश्विक स्तर पर व्यापार का संतुलन बदलने की संभावना जताई जा रही है। यूरोपीय संघ और भारत दोनों ही अमेरिका तथा चीन जैसे बड़े बाज़ारों के प्रभाव से स्वतंत्र होकर
अपने बाजारों को व्यापक स्तर पर जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता विश्व व्यापारी नियमों और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


निष्कर्ष

भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 27 जनवरी 2026 को मुकम्मल हो गया है, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने “Mother of All Deals” कहा है। यह समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार वृद्धि, निवेश सहयोग और रणनीतिक साझेदारी के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा। कानूनी प्रक्रियाओं के बाद जब यह समझौता लागू होगा, तो न केवल व्यापार को बढ़ावा मिलेगा बल्कि दोनों क्षेत्रों के बीच दीर्घकालिक स्थिरता और समृद्धि की नींव भी मजबूत होगी।