March 10, 2026
New Delhi, India
Religious

मोतिहारी में आस्था और इतिहास का संगम: विराट रामायण मंदिर में विश्व के सबसे विशाल अखंड शिवलिंग सहस्त्रलिंगम की स्थापना

ऐतिहासिक धार्मिक उपलब्धि की शुरुआत

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी अंतर्गत कठौलिया (जानकी नगर) में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर परिसर में विश्व के सबसे बड़े अखंड शिवलिंग की स्थापना के साथ एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज हुआ। यह स्थापना केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय सनातन परंपरा, शिल्पकला और आस्था की विराट अभिव्यक्ति मानी जा रही है। यह महाधाम सिर्फ श्रद्धालुओं के लिए ही नहीं, बल्कि धार्मिक महत्व और वास्तुकला के लिहाज से भी ऐतिहासिक है। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस अवसर को जन-आस्था का महापर्व बना दिया। यह शिवलिंग 33 फीट ऊंचा और 2 लाख किलो वजनी है, जिसे एक ही ठोस काले पत्थर से तैयार किया गया है। इस शिवलिंग को “सहस्त्र शिवलिंगम” कहा जाता है, क्योंकि इसके भीतर 1008 छोटे शिवलिंग खुदे हुए हैं।

विराट रामायण मंदिर: विश्वस्तरीय धार्मिक परियोजना

करीब 120 एकड़ क्षेत्र में आकार ले रहा विराट रामायण मंदिर अपने पूर्ण स्वरूप में विश्व का सबसे भव्य रामायण आधारित मंदिर होगा। प्रस्तावित मंदिर की लंबाई 1080 फीट, चौड़ाई 540 फीट तथा मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट होगी। परिसर में कुल 18 शिखर और 22 मंदिर प्रस्तावित हैं, जो इसे वैश्विक धार्मिक मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान दिलाएंगे।

45 दिन की अद्भुत यात्रा

इस विशाल शिवलिंग को तमिलनाडु के महाबलीपुरम से 96-पहियों वाले विशेष ट्रक पर 45 दिनों की यात्रा के बाद मोतिहारी लाया गया। 1008 कारीगरों ने इसे 10 वर्षों में तराशा था। इस यात्रा और निर्माण की कहानी ही भक्तों के लिए आस्था और प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

सहस्त्रलिंगम की अद्वितीय विशेषताएं

स्थापित किया गया यह अखंड शिवलिंग 33 फीट ऊंचा, लगभग 33 फीट गोलाई वाला और 210 मीट्रिक टन वजनी है। इसे तमिलनाडु के महाबलीपुरम स्थित पट्टीकाडु गांव में एक ही काले ग्रेनाइट पत्थर से तराशा गया है। इस शिवलिंग पर 1008 सूक्ष्म शिवलिंग उकेरे गए हैं, जिससे इसे ‘सहस्त्रलिंगम’ कहा जाता है। एक ही पत्थर से इतने विशाल शिवलिंग का निर्माण विश्व में पहली बार किया गया है।

निर्माण की लंबी साधना और शिल्पकला

इस सहस्त्रलिंगम के निर्माण में पूरे 10 वर्ष लगे। 1008 शिल्पकारों ने इसमें योगदान दिया, जिनका नेतृत्व प्रसिद्ध शिल्पकार परिवार द्वारा किया गया। शिवलिंग को आकार देने से पहले शास्त्रों, आगम ग्रंथों और विद्वानों से विस्तृत परामर्श लिया गया। शिवलिंग के तीन भाग—ब्रह्मा, विष्णु और शिव—शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार निर्मित किए गए हैं, जो इसकी धार्मिक प्रामाणिकता को और सुदृढ़ करते हैं।

स्थापना की जटिल और तकनीकी प्रक्रिया

210 मीट्रिक टन वजनी शिवलिंग की स्थापना अपने आप में एक इंजीनियरिंग चमत्कार रही। दो भारी-भरकम क्रेनों की सहायता से शिवलिंग को लगभग 30 फीट की ऊंचाई तक उठाकर 36 फीट ऊंचे आधार पीठ पर स्थापित किया गया। यह पूरी प्रक्रिया करीब आधे घंटे में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। स्थापना के बाद शिवलिंग की कुल ऊंचाई भूतल से 54 से 60 फीट तक पहुंच गई है।

वैदिक विधि से संपन्न धार्मिक अनुष्ठान

स्थापना से पूर्व आगम विधि के अनुसार पीठ पूजा की गई। काशी, मिथिला और देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्वान आचार्यों ने वेद मंत्रों और ईशान संहिता के अनुसार अनुष्ठान संपन्न कराया। नरक निवारण चतुर्दशी के पुण्य अवसर पर हुए इस आयोजन ने पूरे परिसर को भक्तिमय वातावरण से भर दिया, जहां शिव मंत्रों की गूंज और मंगल गीतों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

रामायण मंदिर: शैव, वैष्णव और शाक्त परंपरा का संगम

मोतिहारी में बन रहा रामायण मंदिर सिर्फ शिवलिंग के लिए ही नहीं बल्कि रामायण की पावन कथा से जुड़ा है। यह मंदिर 120 एकड़ क्षेत्र में फैल रहा है, जिसमें मुख्य मंदिर के साथ 22 अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी होंगे। यहां राम दरबार, भव्य शिवलिंग और 10 महाविद्याओं की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। महावीर मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, यह स्थल शैव, वैष्णव और शाक्त परंपरा का संगम होगा, जहां सभी साधक अपने आराध्य की पूजा कर सकेंगे।

रामायण व अयोध्या के राम मंदिर से है करीबी रिश्ता

रामायण मंदिर का स्थान इसलिए चुना गया क्योंकि यह राम-जानकी पथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है। हिंदू मान्यता के अनुसार त्रेतायुग में भगवान राम की बारात इसी मार्ग से होकर निकली थी, और मोतीहारी के इस स्थल पर उसका ठहराव हुआ था। यहीं पहले से ही ठाकुरबाड़ी शिवलिंग भी मौजूद था, जिसे भक्त लंबे समय से पूजते आ रहे हैं। और महावीर मंदिर ट्रस्ट ने पहले भी राम मंदिर निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपये दान किए थे और वर्तमान में राम रसोई का संचालन भी ट्रस्ट करता है। रामायण मंदिर का यह निर्माण अयोध्या के राम मंदिर से आस्था और सेवा के दृष्टिकोण से जुड़ा है।

आचार्य किशोर कुणाल का सपना हुआ साकार

विराट रामायण मंदिर और सहस्त्रलिंगम की यह परिकल्पना दिवंगत पूर्व आईपीएस अधिकारी और धार्मिक न्यास परिषद के पूर्व अध्यक्ष आचार्य किशोर कुणाल का सपना थी। उन्होंने अपने जीवनकाल में इस परियोजना की नींव रखी थी। आज उनके पुत्र और महावीर मंदिर न्यास पटना के सचिव सायण कुणाल ने इस स्वप्न को साकार करते हुए विधिविधान से शिवलिंग की स्थापना कराई। इस अवसर पर समस्तीपुर की सांसद शांभवी चौधरी यजमान के रूप में उपस्थित रहीं।

राजनीतिक और प्रशासनिक सहभागिता

इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी बने। उन्होंने मंदिर परिसर का अवलोकन किया और अधिकारियों से निर्माण की प्रगति की जानकारी ली। उपमुख्यमंत्री, वरिष्ठ मंत्री, मुख्य सचिव और डीजीपी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी कार्यक्रम में मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों ने इसे बिहार और पूरे देश के लिए गर्व का क्षण बताया।

धार्मिक पर्यटन और रामायण सर्किट को मिलेगा बल

विराट रामायण मंदिर, केसरिया बौद्ध स्तूप, अयोध्या और जनकपुर को जोड़ने वाला राम-जानकी पथ इस क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाएगा। संतों और विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना रामायण सर्किट को नई मजबूती देगी और देश-विदेश से श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगी।

विकास, रोजगार और भविष्य की संभावनाएं

मंदिर के निर्माण से पूर्वी चंपारण में सड़क, होटल, हवाई संपर्क, स्थानीय व्यवसाय और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि सहस्त्रलिंगम की स्थापना इस क्षेत्र के लिए शुभ संकेत है और आने वाले वर्षों में यह इलाका आस्था के साथ-साथ आर्थिक और सामाजिक प्रगति का नया केंद्र बनेगा।

विराट रामायण मंदिर में विश्व के सबसे बड़े अखंड सहस्त्रलिंगम की स्थापना केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, शिल्पकला, आस्था और विकास की संयुक्त अभिव्यक्ति है। यह परियोजना पूर्वी चंपारण को वैश्विक धार्मिक मानचित्र पर एक नई पहचान देने की दिशा में निर्णायक कदम साबित हो रही है।

विश्व का सबसे बड़ा अखंड शिवलिंग सहस्त्रलिंगम – तथ्यात्मक आँकड़े

  • विश्व का सबसे बड़ा अखंड सहस्त्रलिंगम
  • एक ही शिला से निर्मित
  • 1008 शिवलिंग उकेरे गए
  • 10 वर्षों का निर्माण
  • 120 एकड़ में फैला विराट रामायण मंदिर
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सामान्य विवरण

  • नाम: अखंड शिवलिंग सहस्त्रलिंगम
  • स्थान: विराट रामायण मंदिर परिसर, जानकी नगर (कठौलिया), मोतिहारी, पूर्वी चंपारण
  • निर्माण स्थल: पट्टीकाडु गांव, महाबलीपुरम, तमिलनाडु
  • पत्थर का प्रकार: ब्लैक ग्रेनाइट (एक ही शिला से निर्मित)

आकार एवं वजन

  • कुल ऊंचाई (शिवलिंग): 33 फीट
  • गोलाई: लगभग 33 फीट
  • वजन: लगभग 210 मीट्रिक टन (2,10,000 किलोग्राम)
  • आधार पीठ की ऊंचाई: 36 फीट
  • भूतल से कुल ऊंचाई (आधार सहित): 54–60 फीट

संरचनात्मक विभाजन (शास्त्रीय मान्यता अनुसार)

  • ब्रह्मा भाग: 6 फीट (आधार पीठ के भीतर)
  • विष्णु भाग: 9 फीट (अर्घा निर्माण हेतु)
  • शिव भाग: 18 फीट (जलाभिषेक हेतु शीर्ष भाग)

विशेष धार्मिक विशेषता

  • शिवलिंग पर उकेरे गए सूक्ष्म शिवलिंग: 1008
  • निर्माण काल: लगभग 10 वर्ष
  • निर्माण में शामिल शिल्पकार: 1008
  • एक ही पत्थर से निर्मित विश्व का सबसे बड़ा सहस्त्रलिंगम

स्थापना प्रक्रिया – तकनीकी आँकड़े

  • प्रयुक्त क्रेन: 2 हैवी-ड्यूटी क्रेन
  • स्थापना ऊंचाई: लगभग 30 फीट
  • कुल समय: लगभग 30 मिनट
  • सुरक्षा व्यवस्था: मल्टी-लेयर बैरिकेडिंग, इंजीनियरिंग सुपरविजन
  • स्थापना विधि: आगम एवं वैदिक शास्त्र सम्मत

विराट रामायण मंदिर – परियोजना आँकड़े

मंदिर परिसर

  • कुल क्षेत्रफल: 120 एकड़
  • मंदिर की कुल लंबाई: 1080 फीट
  • मंदिर की कुल चौड़ाई: 540 फीट

संरचना

  • कुल शिखर: 18
  • कुल मंदिर: 22
  • मुख्य शिखर की प्रस्तावित ऊंचाई: 270 फीट
  • विश्व का सबसे बड़ा रामायण आधारित मंदिर (प्रस्तावित)

नींव एवं आधार

  • नींव की गहराई: लगभग 100 फीट
  • कुल स्तंभ (पिलर): 3102
  • प्रतिदिन कार्यरत मजदूर (औसतन): 250
  • शिलान्यास तिथि: 20 जून 2023

धार्मिक एवं पर्यटन महत्व – कनेक्टिविटी फैक्ट्स

रामायण सर्किट से जुड़ाव:

  • अयोध्या (श्रीराम जन्मभूमि)
  • जनकपुर (माता जानकी जन्मस्थली)
  • राम-जानकी पथ

बौद्ध सर्किट से जुड़ाव:

  • केसरिया बौद्ध स्तूप (विश्व का सबसे बड़ा बौद्ध स्तूप)

संभावित सामाजिक-आर्थिक प्रभाव (अनुमानित)

  • धार्मिक पर्यटन में वार्षिक वृद्धि: 25–40% (अनुमान)
  • संभावित रोजगार सृजन:
  • पर्यटन
  • होटल एवं आतिथ्य
  • परिवहन
  • स्थानीय हस्तशिल्प एवं व्यापार
  • भविष्य की अवसंरचना:
  • सड़क और हाईवे विस्तार
  • होटल व धर्मशाला
  • हवाई संपर्क की संभावनाएं
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प्रमुख व्यक्तित्व – संक्षिप्त प्रोफाइल

  • परियोजना के प्रणेता: स्व. आचार्य किशोर कुणाल

    पूर्व आईपीएस अधिकारी एवं पूर्व अध्यक्ष, धार्मिक न्यास परिषद, बिहार

  • वर्तमान नेतृत्व:
  • सायण कुणाल – सचिव, महावीर मंदिर न्यास पटना
  • सांसद शांभवी चौधरी – यजमान